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transition elements संक्रमण तत्वों के गुण, लक्षण और ऑक्सीकरण अवस्थाओं का विस्तृत विश्लेषण

transition elements संक्रमण तत्वों के गुण, लक्षण और ऑक्सीकरण अवस्थाओं का विस्तृत विश्लेषण|इस लेख में संक्रमण तत्वों के विभिन्न गुणों, लक्षणों और ऑक्सीकरण अवस्थाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसमें अनुन्युबकीय गुण, रंगीन यौगिकों का निर्माण, परमाणु त्रिज्या, और विशिष्ट उदाहरणों सहित ऑक्सीकरण अवस्थाओं का वर्णन शामिल है।

transition elements संक्रमण तत्वों के गुण, लक्षण और ऑक्सीकरण अवस्थाओं का विस्तृत विश्लेषण

संक्रमण तत्वों में निम्नलिखित गुण किस प्रकार बदलते हैं:

(i) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:

संक्रमण तत्वों में विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ पाई जाती हैं। यह गुण उनके d-उपकक्ष में अधूरे इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है। उदाहरण के लिए, मैंगनीज (Mn) विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में पाया जाता है जैसे कि Mn^2+, Mn^3+, Mn^4+, Mn^6+, और Mn^7+।

(ii) अनुन्युबकीय गुण:

संक्रमण तत्वों में अनुन्युबकीय गुण (मग्नेटिक गुण) उनके d-उपकक्ष में अधूरे इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होते हैं। इनमें से कुछ तत्व पैरामैग्नेटिक होते हैं, जबकि अन्य फेरोमैग्नेटिक होते हैं। उदाहरण के लिए, Fe, Co, और Ni में फेरोमैग्नेटिक गुण होते हैं।

(iii) संकर यौगिकों का बनना:

संक्रमण तत्व संकर (कॉम्प्लेक्स) यौगिक बनाते हैं। यह गुण उनके d-उपकक्ष में खाली ऑर्बिटल्स की उपस्थिति और विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में होने की क्षमता के कारण होता है। उदाहरण के लिए, [Fe(CN)6]^3- एक संकर यौगिक है।

(iv) रंग:

संक्रमण तत्व रंगीन यौगिक बनाते हैं। यह गुण उनके d-उपकक्ष में इलेक्ट्रॉनों के ट्रांजिशन के कारण होता है, जिससे प्रकाश का अवशोषण होता है और रंग उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, CuSO4 का नीला रंग।

  1. कारण सहित समझाइए, क्यों—

    (i) अधिकांश संक्रमण तत्व अनुन्युबकीय होते हैं:

    संक्रमण तत्वों में d-उपकक्ष में अधूरे इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे वे अनुन्युबकीय (मग्नेटिक) गुण प्रदर्शित करते हैं। अनुन्युबकीयता उनके परमाणु में अप्रश्लिष्ट इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होती है।

    (ii) संक्रमण धातुओं के योगिक सामान्यतः रंगीन होते हैं:

    संक्रमण धातुओं के यौगिक रंगीन होते हैं क्योंकि उनके d-उपकक्ष में इलेक्ट्रॉनों के ट्रांजिशन से प्रकाश का अवशोषण होता है। यह ट्रांजिशन विभिन्न तरंग दैर्ध्य के प्रकाश को अवशोषित करता है, जिससे यौगिक रंगीन दिखाई देते हैं।

    (iii) सभी संक्रमण धातुएँ परिवर्तनशील संयोजकता प्रदर्शित करती हैं:

    संक्रमण धातुएं विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में पाए जाते हैं, जिससे वे विभिन्न संयोजकता (वैलेंसी) प्रदर्शित कर सकते हैं। यह गुण उनके d-उपकक्ष में अधूरे इलेक्ट्रॉनों और विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में स्थिरता के कारण होता है।

    समझाइए कि संक्रमण तत्वों को परमाणु त्रिज्याएँ आवर्त सारणी में बायीं ओर जाने पर क्यों घटती हैं?

    संक्रमण तत्वों की परमाणु त्रिज्या आवर्त सारणी में बाईं ओर जाने पर घटती है क्योंकि परमाणु संख्या बढ़ने पर प्रोटॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे नाभिक का आकर्षण बल बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन अधिक कसकर नाभिक की ओर खींचे जाते हैं। इस कारण, परमाणु त्रिज्या घटती है।

    संक्रमण तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं के विशिष्ट लक्षणों का वर्णन कीजिए तथा उत्तर उदाहरण सहित दीजिए।

संक्रमण तत्व विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में पाए जाते हैं, जिससे उनके रासायनिक गुणधर्मों में विविधता होती है। उदाहरण के लिए:

  • क्रोमियम (Cr): Cr^2+ (नीला), Cr^3+ (हरा), Cr^6+ (पीला)
  • मैंगनीज (Mn): Mn^2+ (गुलाबी), Mn^4+ (भूरा), Mn^6+ (हरा), Mn^7+ (बैंगनी)
  • लोहा (Fe): Fe^2+ (हरा), Fe^3+ (पीला/भूरा)स्कैंडियम की प्रमुख ऑक्सीकरण अवस्थाएँ बताइए।

स्कैंडियम (Sc) की प्रमुख ऑक्सीकरण अवस्था +3 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d^1 4s^2 होता है, और यह सामान्यत: Sc^3+ आयन के रूप में पाया जाता है।

टाइटेनियम की प्रमुख ऑक्सीकरण अवस्थाएँ बताइए।

टाइटेनियम (Ti) की प्रमुख ऑक्सीकरण अवस्थाएँ +2, +3, और +4 हैं। उदाहरण के लिए:

  • Ti^2+: दुर्लभ और कम स्थिर
  • Ti^3+: बैंगनी रंग का
  • Ti^4+: रंगहीन (जलीय घोल में)

इन उत्तरों से संक्रमण तत्वों के विभिन्न गुण और उनके रासायनिक व्यवहार की विस्तृत जानकारी मिलती है।

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