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paper chromatography in hindi 2024

paper chromatography in hindi 2024.पेपर क्रोमैटोग्राफी द्वारा अकार्बनिक आयनों के प्रथक्करण की विधि को विस्तार से समझें। इसमें तैयारी, नमूना आवेदन, विकास प्रक्रिया, अलगाव, और आयनों की पहचान शामिल हैं। यह तकनीक सरल, प्रभावी और व्यापक रूप से रासायनिक विश्लेषण में उपयोगी है।

paper chromatography in hindi 2024

पेपर क्रोमैटोग्राफी द्वारा अकार्बनिक आयनों के प्रथक्करण की विधि

पेपर क्रोमैटोग्राफी की विधि को चरणबद्ध रूप से समझाया गया है:

आवश्यक सामग्री:

  1. क्रोमैटोग्राफी पेपर
  2. नमूना समाधान जिसमें अकार्बनिक आयनों का मिश्रण हो
  3. विकासक (सॉल्वेंट)
  4. क्रोमैटोग्राफी बर्तन (जैसे बीकर या जार)
  5. पिपेट या माइक्रोस्पॉटिंग कैपिलरी ट्यूब
  6. पेंसिल
  7. रासायनिक अभिकर्मक (रेएजेंट) आयनों की पहचान के लिए

विधि:

  1. तैयारी (Preparation):
    • एक उपयुक्त आकार का क्रोमैटोग्राफी पेपर काटें।
    • पेपर के एक छोर से लगभग 2-3 सेंटीमीटर ऊपर एक पेंसिल का उपयोग करके हल्की रेखा खींचें। इसे “स्टार्टिंग लाइन” कहते हैं।
  2. नमूना आवेदन (Sample Application):
    • पिपेट या माइक्रोस्पॉटिंग कैपिलरी ट्यूब का उपयोग करके, नमूना समाधान की एक छोटी बूंद को स्टार्टिंग लाइन पर रखें। यदि आवश्यक हो तो इसे सूखने दें और पुनः नमूना लगाएँ ताकि पर्याप्त मात्रा में आयन पेपर पर हो।
  3. विकासक का चयन (Selection of Solvent):
    • उपयुक्त विकासक (सॉल्वेंट) का चयन करें जो अकार्बनिक आयनों को प्रभावी ढंग से अलग कर सके। सामान्यत: अम्लीय या क्षारीय सॉल्वेंट का उपयोग किया जाता है।
  4. विकास प्रक्रिया (Development Process):
    • क्रोमैटोग्राफी बर्तन (जैसे बीकर या जार) में थोड़ा सॉल्वेंट डालें।
    • क्रोमैटोग्राफी पेपर को ऊर्ध्वाधर स्थिति में बर्तन में रखें ताकि पेपर का निचला हिस्सा सॉल्वेंट में डूबा हो, लेकिन स्टार्टिंग लाइन सॉल्वेंट से ऊपर हो।
    • सुनिश्चित करें कि बर्तन को ढक्कन से ढक दिया जाए ताकि सॉल्वेंट का वाष्पीकरण कम से कम हो।
  5. अलगाव (Separation):
    • सॉल्वेंट धीरे-धीरे पेपर के माध्यम से ऊपर की ओर चढ़ेगा और नमूना बिंदु से गुजरते हुए विभिन्न आयनों को अलग करेगा।
    • यह प्रक्रिया तब तक जारी रखें जब तक सॉल्वेंट फ्रंट एक निश्चित ऊँचाई तक न पहुँच जाए।
  6. सॉल्वेंट फ्रंट की मार्किंग (Marking the Solvent Front):
    • जब सॉल्वेंट फ्रंट उचित ऊँचाई पर पहुँच जाए, पेपर को बर्तन से निकालें और सॉल्वेंट फ्रंट को पेंसिल से चिह्नित करें।
    • पेपर को हवा में सूखने दें।
  7. आयनों की पहचान (Identification of Ions):
    • पेपर पर विभिन्न आयनों के धब्बों का पता लगाने के लिए विशिष्ट रासायनिक अभिकर्मकों (रेएजेंट्स) का उपयोग करें, जो आयनों के साथ प्रतिक्रिया करके रंगीन धब्बे बनाते हैं।
    • धब्बों की स्थिति और रंग के आधार पर अज्ञात आयनों की पहचान करें।
    • आरएफ (Rf) मूल्य की गणना करके भी आयनों की पहचान की जा सकती है। Rf मूल्य वह अनुपात है जिसमें सॉल्वेंट फ्रंट और आयन फ्रंट का अनुपात होता है:

 

Rf=आयन द्वारा तय की गई दूरीसॉल्वेंट फ्रंट द्वारा तय की गई दूरीR_f = \frac{\text{आयन द्वारा तय की गई दूरी}}{\text{सॉल्वेंट फ्रंट द्वारा तय की गई दूरी}}

निष्कर्ष:

पेपर क्रोमैटोग्राफी एक प्रभावी और सरल तकनीक है जो अकार्बनिक आयनों के प्रथक्करण और पहचान के लिए उपयोग की जाती है। यह विधि प्रयोगशालाओं में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है और रासायनिक विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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