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hplc chromatography:सिद्धांत, प्रायोगिक विधि और अनुप्रयोग

hplc chromatography:सिद्धांत, प्रायोगिक विधि और अनुप्रयोग|उच्च-प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी (HPLC) के सिद्धांत, प्रायोगिक विधि और इसके विभिन्न अनुप्रयोगों के बारे में विस्तारपूर्वक जानें। जानें कैसे HPLC तकनीक का उपयोग मिश्रणों को अलग करने, पहचानने और मात्रा निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

hplc chromatography:सिद्धांत, प्रायोगिक विधि और अनुप्रयोग

उच्च-प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी (HPLC) का सिद्धांत

उच्च-प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी (HPLC) एक शक्तिशाली विश्लेषणात्मक तकनीक है जिसका उपयोग विभिन्न यौगिकों को अलग करने, पहचानने और मात्रात्मक रूप से विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। HPLC का सिद्धांत विभिन्न घटकों के बीच उनकी अभिलाक्षणिक विशेषताओं के आधार पर पृथक्करण पर आधारित है। यहाँ HPLC के सिद्धांत का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है:

HPLC का सिद्धांत:

  1. स्थिर चरण (Stationary Phase):
    • HPLC कॉलम में भरा गया पदार्थ, जिसे स्थिर चरण कहा जाता है, यौगिकों को अलग करने के लिए कार्य करता है।
    • आमतौर पर सिलिका जेल या विभिन्न प्रकार के बांडेड फेज जैसे C18 का उपयोग किया जाता है।
    • स्थिर चरण का चयन सैंपल के गुणधर्मों और पृथक्करण के उद्देश्य पर निर्भर करता है।
  2. गतिशील चरण (Mobile Phase):
    • गतिशील चरण एक द्रव होता है जो कॉलम के माध्यम से बहता है और सैंपल के यौगिकों को स्थिर चरण के साथ बातचीत करते हुए आगे बढ़ाता है।
    • मोबाइल फेज का चयन सैंपल के प्रकार और पृथक्करण की आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है।
    • सामान्य मोबाइल फेज में पानी, मेथेनॉल, एसिटोनिट्राइल, या इनका मिश्रण शामिल हो सकता है।
  3. सैंपल इंजेक्शन:
    • सैंपल को HPLC सिस्टम में इंजेक्ट किया जाता है, आमतौर पर एक ऑटो-सैंपलर का उपयोग करके।
    • सैंपल मोबाइल फेज के साथ मिलकर कॉलम में प्रवेश करता है।
  4. पृथक्करण प्रक्रिया:
    • सैंपल के यौगिक कॉलम में प्रवेश करने पर स्थिर चरण और गतिशील चरण के बीच बातचीत करते हैं।
    • प्रत्येक यौगिक की स्थिर चरण के साथ बातचीत की अभिलाक्षणिक समय (रिटेंशन टाइम) अलग-अलग होती है।
    • जिन यौगिकों की स्थिर चरण के साथ मजबूत बातचीत होती है, वे कॉलम में अधिक समय तक रहते हैं, जबकि जिनकी बातचीत कमजोर होती है, वे तेजी से बाहर निकलते हैं।
  5. डिटेक्शन:
    • कॉलम से निकलने वाले यौगिक डिटेक्टर से गुजरते हैं, जो उनके प्रवाह दर और सांद्रता को मापता है।
    • डिटेक्टर आमतौर पर UV-VIS, फ्लोरोसेंस, या मास स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित हो सकते हैं।
    • डिटेक्टर डेटा को क्रोमैटोग्राम के रूप में रिकॉर्ड करता है, जिसमें विभिन्न यौगिकों की पिक्स (शिखर) दिखाई देती हैं।
  6. क्रोमैटोग्राम विश्लेषण:
    • क्रोमैटोग्राम में प्रत्येक शिखर किसी विशेष यौगिक का प्रतिनिधित्व करता है।
    • शिखर का रिटेंशन टाइम यौगिक की पहचान में सहायक होता है।
    • शिखर का क्षेत्रफल या ऊँचाई यौगिक की सांद्रता को दर्शाता है।

HPLC के सिद्धांत की प्रमुख अवधारणाएँ:

  1. विभाजन (Partitioning):
    • विभाजन सिद्धांत के अनुसार, यौगिक दो असंगत फेजों के बीच विभाजित होते हैं: स्थिर और गतिशील चरण।
    • प्रत्येक यौगिक की स्थिर चरण के साथ बातचीत की ताकत विभाजन गुणांक (Partition Coefficient) द्वारा नियंत्रित होती है।
  2. वितरण (Distribution):
    • यौगिक स्थिर और गतिशील चरणों के बीच अपने वितरण गुणांक के अनुसार वितरित होते हैं।
    • यह गुणांक यौगिक की ध्रुवीयता, हाइड्रोफोबिसिटी, और अन्य रासायनिक गुणधर्मों पर निर्भर करता है।
  3. रिटेंशन टाइम (Retention Time):
    • रिटेंशन टाइम वह समय है जो यौगिक को कॉलम से बाहर निकलने में लगता है।
    • यह समय यौगिक की स्थिर चरण के साथ बातचीत की ताकत और कॉलम की लंबाई पर निर्भर करता है।
  4. अवक्षेपण (Elution):
    • अवक्षेपण प्रक्रिया वह है जिसमें यौगिक मोबाइल फेज के साथ कॉलम से बाहर निकलते हैं।
    • अवक्षेपण प्रोफाइल को मोबाइल फेज की संरचना और प्रवाह दर द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

HPLC का सिद्धांत यौगिकों के पृथक्करण की इन बुनियादी अवधारणाओं पर आधारित है। यह तकनीक विभिन्न क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी है, जैसे औषधि निर्माण, खाद्य विश्लेषण, पर्यावरण निगरानी, और जैव चिकित्सा अनुसंधान। HPLC की उच्च संवेदनशीलता, विश्लेषणात्मक क्षमता, और विविधता इसे वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योगों में एक महत्वपूर्ण उपकरण बनाती है।

उच्च-प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी (HPLC) की व्यावहारिक प्रक्रिया

HPLC (उच्च-प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी) एक विश्लेषणात्मक तकनीक है जिसका उपयोग विभिन्न यौगिकों को अलग करने, पहचानने और उनकी मात्रा निर्धारित करने के लिए किया जाता है। यहाँ HPLC की व्यावहारिक प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है:

1. उपकरण और सामग्री:

  • HPLC सिस्टम: जिसमें पंप, ऑटो-सैंपलर, कॉलम, डिटेक्टर (जैसे UV-VIS डिटेक्टर) और डेटा एक्वीजीशन सिस्टम शामिल होते हैं।
  • मोबाइल फेज: आमतौर पर मेथेनॉल, एसिटोनिट्राइल, पानी या इनका मिश्रण।
  • सैंपल: विश्लेषण के लिए तैयार किया गया सॉल्यूशन।
  • फ़िल्टर: सैंपल को फ़िल्टर करने के लिए।
  • HPLC वायल्स: सैंपल रखने के लिए।
  • सॉफ़्टवेयर: डेटा संग्रहण और विश्लेषण के लिए।

2. सैंपल तैयारी:

  • सैंपल को उपयुक्त विलायक (solvent) में घोलें।
  • सॉल्यूशन को 0.45 माइक्रोन फ़िल्टर से फ़िल्टर करें ताकि कोई ठोस कण न रह जाए।
  • फ़िल्टर किए गए सैंपल को HPLC वायल में स्थानांतरित करें और वायल को ऑटो-सैंपलर ट्रे में रखें।

3. मोबाइल फेज की तैयारी:

  • मोबाइल फेज के रूप में उपयोग किए जाने वाले विलायकों को चुनें और उनकी सही मात्रा मिलाएं।
  • मोबाइल फेज को डिगास (degass) करें ताकि उसमें कोई गैस बुलबुले न रह जाएं। यह अल्ट्रासोनिक बाथ या डिगासिंग यूनिट का उपयोग करके किया जा सकता है।
  • मोबाइल फेज को HPLC सिस्टम के रिजर्वायर में डालें।

4. कॉलम का चयन और कंडीशनिंग:

  • विश्लेषण के लिए उपयुक्त HPLC कॉलम का चयन करें (जैसे C18 कॉलम)।
  • कॉलम को HPLC सिस्टम में स्थापित करें और मोबाइल फेज के साथ फ्लश करें ताकि कॉलम संतुलित हो जाए।
  • कॉलम को कंडीशन करें (आमतौर पर 10-15 मिनट तक) ताकि वह स्थिर अवस्था में आ जाए।

5. सिस्टम पैरामीटर सेटअप:

  • पंप की प्रवाह दर (flow rate) सेट करें, जैसे 1.0 mL/min।
  • कॉलम तापमान सेट करें, जैसे 25°C।
  • डिटेक्टर की तरंग दैर्ध्य (wavelength) सेट करें, जैसे 254 nm।
  • इंजेक्शन वॉल्यूम सेट करें, जैसे 20 µL।

6. सैंपल इंजेक्शन और डेटा संग्रहण:

  • सैंपल को ऑटो-सैंपलर का उपयोग करके इंजेक्ट करें या मैन्युअल रूप से इंजेक्ट करें।
  • इंजेक्शन के बाद, सैंपल कॉलम में प्रवेश करता है और मोबाइल फेज के साथ यात्रा करता है।
  • कॉलम के माध्यम से सैंपल के घटक अलग होते हैं और डिटेक्टर तक पहुंचते हैं।
  • डिटेक्टर डेटा को रिकॉर्ड करता है और एक क्रोमैटोग्राम उत्पन्न करता है, जिसमें विभिन्न यौगिकों के पिक्स (शिखर) दिखाई देते हैं।

7. क्रोमैटोग्राम विश्लेषण:

  • क्रोमैटोग्राम में प्रत्येक शिखर किसी विशेष यौगिक का प्रतिनिधित्व करता है।
  • शिखर का रिटेंशन टाइम यौगिक की पहचान में मदद करता है।
  • शिखर के क्षेत्रफल या ऊँचाई को मापकर यौगिक की सांद्रता का निर्धारण किया जाता है।
  • कैलिब्रेशन कर्व का उपयोग करके अज्ञात सैंपल की सांद्रता का पता लगाया जाता है।

8. सिस्टम की सफाई और रखरखाव:

  • विश्लेषण के बाद, कॉलम और सिस्टम को साफ करें।
  • मोबाइल फेज के रूप में उपयोग किए गए विलायकों को सिस्टम से हटाकर प्रणाली को पानी या उचित सॉल्वेंट से फ्लश करें।
  • उपकरण को बंद करें और अगले उपयोग के लिए तैयार करें।

HPLC के अनुप्रयोग:

  • फार्मास्यूटिकल उद्योग: दवाओं की शुद्धता और अशुद्धियों की पहचान।
  • खाद्य उद्योग: खाद्य पदार्थों में संरक्षक, विटामिन और अन्य यौगिकों का विश्लेषण।
  • पर्यावरण निगरानी: पानी, मिट्टी और हवा में प्रदूषकों की पहचान।
  • क्लिनिकल और बायोमेडिकल अध्ययन: जैविक नमूनों में ड्रग्स और मेटाबोलाइट्स की पहचान।
  • रासायनिक उद्योग: रसायनों की शुद्धता और संरचना का विश्लेषण।

HPLC तकनीक अत्यधिक संवेदनशील और सटीक होती है, जिससे यह विभिन्न उद्योगों और अनुसंधान के क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। इसके उच्च प्रदर्शन और विस्तृत अनुप्रयोग इसे विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपकरण बनाते हैं।

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