B.Sc.1 Year Major 1 Unit III Module 1

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B.Sc.1 Year Major 1 Unit III Module 1

s- और p-block तत्वों की periodic properties—परमाण्विक आकार, आयनीकरण ऊर्जा, इलेक्ट्रॉन अभिलाषा व विद्युतऋणात्मकता—को सरल उदाहरणों के साथ समझाया गया है। यह सामग्री B.Sc, M.Sc, IIT-JAM व NEET विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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Module 1: Introduction to Periodic Properties

आवर्त सारणी क्या है? (Step-by-Step With Examples)

आवर्त सारणी (Periodic Table) सभी रासायनिक तत्वों की एक वैज्ञानिक सूची है जिसे तीन मुख्य आधारों पर व्यवस्थित किया गया है:

(A) परमाणु क्रमांक (Atomic Number)

परमाणु क्रमांक = किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन की संख्या

☑ उदाहरण

  • हाइड्रोजन (H) → परमाणु क्रमांक = 1 (क्योंकि इसमें 1 प्रोटॉन होता है)
  • ऑक्सीजन (O) → परमाणु क्रमांक = 8 (क्योंकि इसमें 8 प्रोटॉन होते हैं)

👉 आवर्त सारणी में तत्व को उसकी सही जगह परमाणु क्रमांक से ही रखा जाता है।

(B) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration)

इलेक्ट्रॉन परमाणु के चारों ओर ऊर्जा स्तरों (K, L, M…) में कैसे भरे हैं — यही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है।

☑ उदाहरण

  • सोडियम (Na) → परमाणु क्रमांक 11
    इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1
    → यानी अंतिम शेल में 1 इलेक्ट्रॉन है
  • क्लोरीन (Cl) → परमाणु क्रमांक 17
    विन्यास = 2, 8, 7
    → यानी अंतिम शेल में 7 इलेक्ट्रॉन हैं

👉 अंतिम शेल के इलेक्ट्रॉनों से तत्व का रासायनिक व्यवहार तय होता है।

(C) दोहराने वाले रासायनिक गुण (Periodic Properties)

कुछ तत्वों के गुण दोहराते हैं — जैसे

  • क्रियाशीलता (reactivity)
  • आयन बनने की क्षमता
  • धात्विक व अधात्विक गुण
  • परमाणु आकार आदि

☑ उदाहरण

  • लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K)
    → सबके अंतिम शेल में 1 इलेक्ट्रॉन
    → इसलिए तीनों की क्रियाशीलता मिलती-जुलती
    → ये सभी क्षार धातु (Alkali Metals) हैं
  • फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br)
    → अंतिम शेल में 7 इलेक्ट्रॉन
    → सभी बहुत क्रियाशील अधातु
    → इन्हें हैलोजन (Halogens) कहते हैं

👉 इसी “गुणों के दोहराव” के कारण इसे Periodic Table कहा जाता है।

आवर्त सारणी महत्वपूर्ण क्यों है? (Step-by-Step With Examples)

किसी भी तत्व का व्यवहार बताती है

तत्व कैसे प्रतिक्रिया देगा, ये उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से तुरन्त पता चलता है।

☑ उदाहरण

  • सोडियम (Na) → 2, 8, 1
    अंतिम शेल में 1 इलेक्ट्रॉन → यह आसानी से खो देता है
    → इसलिए यह बहुत क्रियाशील धातु है।
  • नीयॉन (Ne) → 2, 8
    अंतिम शेल भरा हुआ → यह प्रतिक्रिया नहीं करता
    → इसलिए नीयॉन एक निष्क्रिय गैस है।

तत्व का आकार पता चलता है (Atomic Size)

आवर्त सारणी में

  • समूह (ऊपर → नीचे) जाने पर आकार बढ़ता है
  • आवर्त (बाएँ → दाएँ) जाने पर आकार घटता है

☑ उदाहरण

Li < Na < K
(क्योंकि नीचे जाने पर नए शेल जुड़ते हैं)

क्रियाशीलता का अनुमान चलता है

किसी तत्व की reactivity उसके इलेक्ट्रॉनों से तय होती है।

☑ उदाहरण

  • पोटैशियम (K) → सोडियम (Na) से अधिक क्रियाशील
    क्योंकि पोटैशियम में इलेक्ट्रॉन दूर है → आसानी से निकल जाता है।
  • फ्लोरीन (F) → क्लोरीन (Cl) से अधिक क्रियाशील
    क्योंकि F छोटे आकार वाला है → इलेक्ट्रॉन को ज्यादा जोर से खींचता है।

धातु, अधातु, उपधातु पहचानने में मदद करती है

आवर्त सारणी देखकर पता चल जाता है कि कोई तत्व किस श्रेणी का है।

☑ उदाहरण

  • बाएँ तरफ = धातुएँ (Na, Mg, Al)
  • दाएँ तरफ = अधातुएँ (O, N, Cl)
  • बीच में = उपधातु (B, Si, Ge)

तत्वों के उपयोग और गुण पहले से अनुमानित किए जा सकते हैं

इसीलिए वैज्ञानिक नए तत्व खोजने पर भी उसके गुण पहले से बता देते हैं।

☑ उदाहरण

एक नया तत्व → समूह 1 में रखा गया
इसका मतलब:
✔ यह धातु होगा
✔ पानी के साथ तेज प्रतिक्रिया करेगा
✔ +1 आयन बनाएगा
✔ नरम और चांदी जैसा होगा

s-ब्लॉक तत्व (Groups 1 और 2) — Step-by-Step With Examples

s-ब्लॉक क्या है?

वे तत्व जिनके अंतिम (valence) इलेक्ट्रॉन s-ऑर्बिटल में होते हैं — उन्हें
s-block elements कहते हैं।

👉 समूह 1 (Alkali Metals)
👉 समूह 2 (Alkaline Earth Metals)

मुख्य गुण + उदाहरण के साथ

अत्यधिक क्रियाशील (Highly Reactive)

क्यों?

क्योंकि इनके अंतिम शेल में

  • समूह 1 में = 1 इलेक्ट्रॉन
  • समूह 2 में = 2 इलेक्ट्रॉन
    ये इलेक्ट्रॉन आसानी से निकल जाते हैं।

☑ उदाहरण

सोडियम (Na):
Na → 2, 8, 1 → अपना 1 इलेक्ट्रॉन बहुत जल्दी छोड़ देता है।
इसलिए पानी में डालते ही तीव्र प्रतिक्रिया करता है।

कैल्शियम (Ca):
Ca → 2, 8, 8, 2 → 2 इलेक्ट्रॉन आसानी से छोड़ देता है।
→ पानी में प्रतिक्रिया कर H₂ गैस बनाता है।

आयनीकरण ऊर्जा कम (Low Ionization Energy)

क्यों?

इनका अंतिम इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होता है → निकालना आसान।

☑ उदाहरण

  • लिथियम (Li): 2, 1 → इसका 2s¹ इलेक्ट्रॉन कम ऊर्जा में निकल जाता है।
  • पोटैशियम (K): आकार बड़ा → अंतिम इलेक्ट्रॉन और भी दूर
    → K की आयनीकरण ऊर्जा Li से भी कम।

परमाण्विक त्रिज्या बड़ी (Large Atomic Radius)

क्यों?

ग्रुप 1 और 2 के तत्वों में शेल लगातार बढ़ते हैं।

☑ उदाहरण

Li < Na < K < Rb
→ नीचे जाते हुए हर बार एक नया शेल जुड़ता है, इसलिए आकार बढ़ता है।

Be < Mg < Ca < Sr
→ समूह 2 का भी यही क्रम है।

अच्छे अपचायक (Strong Reducing Agents)

क्यों?

ये इलेक्ट्रॉन देने में माहिर होते हैं।
जो तत्व इलेक्ट्रॉन देता है → वह Reducing Agent कहलाता है।

☑ उदाहरण

  • Na → Na⁺ + e⁻ (तेजी से इलेक्ट्रॉन देता है)
  • Ca → Ca²⁺ + 2e⁻ (दो इलेक्ट्रॉन आसानी से देता है)

👉 इसलिए Na, K, Ca बहुत मजबूत reducing agents हैं।

 s-ब्लॉक के उदाहरण

Group 1 (Alkali Metals)

  • लिथियम (Li) → इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2s¹
  • सोडियम (Na) → 3s¹
  • पोटैशियम (K) → 4s¹

Group 2 (Alkaline Earth Metals)

  • कैल्शियम (Ca) → 4s²
  • मैग्नीशियम (Mg) → 3s²
  • बेरिलियम (Be) → 2s²

p-ब्लॉक तत्व (Groups 13–18) — Step-by-Step With Examples

p-ब्लॉक क्या है?

वे तत्व जिनके अंतिम (valence) इलेक्ट्रॉन p-ऑर्बिटल (px, py, pz) में स्थित होते हैं,
उन्हें p-block elements कहते हैं।

👉 ये Periodic Table के दाएँ हिस्से में पाए जाते हैं (Groups 13 से 18)।
👉 कुल 6 कॉलम और 6 इलेक्ट्रॉन की क्षमता (p¹–p⁶)

मुख्य गुण — उदाहरण सहित

विविधता (Maximum Variety of Elements और Compounds)

p-ब्लॉक में आपको मिलते हैं—

  • धातु (Aluminium, Gallium)
  • अधातु (Nitrogen, Oxygen, Carbon, Sulphur)
  • उपधातु (Boron, Silicon, Arsenic)

उदाहरण

  • Carbon (C) → अधातु, ग्रेफाइट/डायमंड बनाता है
  • Silicon (Si) → उपधातु, सेमीकंडक्टर
  • Aluminium (Al) → धातु

👉 यह diversity पूरी periodic table में सिर्फ p-ब्लॉक में सबसे ज़्यादा है।

आयनीकरण ऊर्जा अधिक (Higher Ionization Energy)

क्यों?

p-ब्लॉक के तत्व आकार में छोटे होते हैं और नाभिक की पकड़ मजबूत →
इलेक्ट्रॉन निकालना मुश्किल।

उदाहरण

  • N (नाइट्रोजन) की IE → बहुत अधिक
  • O (ऑक्सीजन) की IE → N से कम (क्योंकि pairing repulsion है)

इलेक्ट्रोनगैटिविटी अधिक (High Electronegativity)

क्यों?

-p ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉन n = छोटा principal quantum number
-आकर्षण = अधिक

उदाहरण

  • Fluorine (F) = सबसे अधिक electronegative तत्व
  • Oxygen (O) = दूसरा सबसे अधिक

परमाण्विक त्रिज्या छोटी (Small Atomic Radius)

क्यों?

Period में बाएँ → दाएँ जाते हुए प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इसलिए p-ब्लॉक में आकार छोटा होता है।

उदाहरण

  • B (बोरॉन) > C (कार्बन) > N (नाइट्रोजन) > O (ऑक्सीजन)
    → बाएँ से दाएँ आकार छोटा।

ऑक्साइड और हाइड्राइड दोनों प्रकार के बनाते हैं

धातु → बुनियादी ऑक्साइड (Basic Oxide)

Al₂O₃ → Amphoteric

अधातु → अम्लीय ऑक्साइड (Acidic Oxide)

CO₂, SO₂, SO₃, N₂O₅

उदाहरण

  • CO₂ → Acidic Oxide
  • Al₂O₃ → Acidic भी + Basic भी
  • Na₂O → (s-block) Basic Oxide (Comparison)

कई oxidation states (Multiple Oxidation States)

क्यों?

p-ब्लॉक में ns² np¹–⁶ electrons होने से कई इलेक्ट्रॉन हट या जोड़ सकते हैं।

उदाहरण

  • Nitrogen (N): −3, −2, −1, 0, +1, +2, +3, +4, +5
  • Sulphur (S): −2, +4, +6
  • Chlorine (Cl): −1, +1, +3, +5, +7

द्रव्य का प्रकार (Type of Elements)

Group-wise variety:

Group 13 → धातुक तत्व (Boron exception है)

  • Al, Ga, In → Metals
  • B → Metalloid

Group 14 → धातु + अधातु + उपधातु

  • C → Non-metal
  • Si, Ge → Metalloids
  • Sn, Pb → Metals

Group 15 → Pnictogens

  • N, P → Non-metals
  • As, Sb → Metalloids
  • Bi → Metal

Group 16 → Chalcogens

  • O, S → Non-metals
  • Se, Te → Metalloids
  • Po → Metal

Group 17 → Halogens

  • सभी अधातु
  • F, Cl, Br, I (solid–liquid–gas variety भी है)

Group 18 → Noble Gases

  • He, Ne, Ar … inert gases

p-ब्लॉक में नीचे जाने पर metallic character बढ़ता है

उदाहरण:

Group 14
C (Non-metal)

Si, Ge (Metalloid)

Sn, Pb (Metals)

👉 नीचे जाते हुए तत्व भारी होते हैं → इलेक्ट्रॉन लूज़ करना आसान → metallic character बढ़ता है।

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