First Law of Thermodynamics and Thermochemistry
First Law of Thermodynamics and Thermochemistry पर आधारित इस हिंदी लेख में ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम, Enthalpy, Heat Capacity, Joule-Thomson Effect, Thermochemistry, Hess’s Law तथा Phase Equilibrium की विस्तृत जानकारी B.Sc. Chemistry के लिए दी गई है।
परिचय
ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) रसायन विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो ऊर्जा (Energy), ऊष्मा (Heat) तथा कार्य (Work) के बीच संबंधों का अध्ययन करती है। किसी भी रासायनिक या भौतिक परिवर्तन के दौरान ऊर्जा का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश, बल्कि यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है। इस सिद्धांत को ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics) कहा जाता है।
इसी प्रकार, रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान होने वाले ऊष्मा परिवर्तन का अध्ययन ऊष्मारसायन (Thermochemistry) के अंतर्गत किया जाता है। एन्थैल्पी (Enthalpy), हेस का नियम (Hess’s Law), जूल-थॉमसन प्रभाव (Joule-Thomson Effect) तथा प्रावस्था साम्य (Phase Equilibrium) जैसे विषय इसी अध्याय के प्रमुख भाग हैं।
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics)
यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
परिभाषा
ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, जब ईंधन जलता है तो उसकी रासायनिक ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
गणितीय रूप
जहाँ—
- ΔU = आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन
- q = सिस्टम द्वारा ग्रहण या उत्सर्जित ऊष्मा
- w = सिस्टम पर किया गया कार्य
यदि सिस्टम ऊष्मा ग्रहण करता है, तो q धनात्मक (+) होता है और यदि ऊष्मा छोड़ता है, तो q ऋणात्मक (-) होता है।
प्रथम नियम का महत्व
- ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत स्पष्ट करता है।
- रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊर्जा परिवर्तन की गणना संभव होती है।
- इंजन, रेफ्रिजरेटर और औद्योगिक प्रक्रियाओं के अध्ययन में उपयोगी।
- ऊष्मागतिकी के अन्य नियमों की आधारशिला है।
एन्थैल्पी (Enthalpy)
एन्थैल्पी किसी सिस्टम की कुल ऊष्मीय ऊर्जा का माप है। इसे H से प्रदर्शित किया जाता है।
जहाँ—
- H = Enthalpy
- U = Internal Energy
- P = Pressure
- V = Volume
स्थिर दाब पर होने वाले ऊष्मा परिवर्तन को एन्थैल्पी परिवर्तन (ΔH) कहते हैं।
एन्थैल्पी के प्रकार
- निर्माण एन्थैल्पी (Enthalpy of Formation)
- दहन एन्थैल्पी (Enthalpy of Combustion)
- उदासीनीकरण एन्थैल्पी (Enthalpy of Neutralization)
- विलयन एन्थैल्पी (Enthalpy of Solution)
ऊष्मा धारिता (Heat Capacity)
किसी पदार्थ का तापमान 1 K या 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उसकी Heat Capacity कहते हैं।
प्रकार
1. स्थिर आयतन पर ऊष्मा धारिता (Cv)
जब आयतन स्थिर रहता है।
2. स्थिर दाब पर ऊष्मा धारिता (Cp)
जब दाब स्थिर रहता है।
आदर्श गैसों के लिए
Joule-Thomson Effect
जब किसी वास्तविक गैस को बिना ऊष्मा के आदान-प्रदान (Adiabatic Condition) के उच्च दाब से निम्न दाब पर प्रवाहित किया जाता है, तब उसके तापमान में परिवर्तन होता है। इसे Joule-Thomson Effect कहते हैं।
Joule-Thomson Coefficient
यदि μ धनात्मक है, तो गैस ठंडी होती है और यदि ऋणात्मक है, तो गैस गर्म होती है।
Inversion Temperature
वह तापमान जिस पर Joule-Thomson प्रभाव की दिशा बदल जाती है, Inversion Temperature कहलाता है।
इस तापमान से नीचे गैस फैलने पर ठंडी होती है तथा ऊपर गर्म हो जाती है।
Isothermal एवं Adiabatic Expansion
Isothermal Expansion
- तापमान स्थिर रहता है।
- आदर्श गैस के लिए ΔU = 0
- प्राप्त ऊष्मा कार्य के बराबर होती है।
Adiabatic Expansion
- ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता।
- q = 0
- कार्य आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन से प्राप्त होता है।
ऊष्मारसायन (Thermochemistry)
ऊष्मारसायन रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें रासायनिक अभिक्रियाओं के दौरान उत्पन्न या अवशोषित ऊष्मा का अध्ययन किया जाता है।
मानक अवस्था (Standard State)
किसी पदार्थ की वह अवस्था जिसमें दाब 1 bar तथा तापमान सामान्यतः 298 K (25°C) हो, मानक अवस्था कहलाती है।
निर्माण एन्थैल्पी (Enthalpy of Formation)
जब किसी यौगिक का 1 मोल उसके तत्वों से मानक अवस्था में बनता है, तब होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तन को निर्माण एन्थैल्पी कहते हैं।
Hess का नियम (Hess’s Law)
कथन
यदि कोई रासायनिक अभिक्रिया एक चरण में हो या अनेक चरणों में, कुल एन्थैल्पी परिवर्तन समान रहता है।
महत्व
- अज्ञात एन्थैल्पी की गणना
- निर्माण ऊष्मा ज्ञात करना
- दहन ऊष्मा की गणना
- बंध ऊर्जा का निर्धारण
Phase Equilibrium (प्रावस्था साम्य)
जब किसी पदार्थ की दो या अधिक अवस्थाएँ संतुलन में रहती हैं, तब उसे Phase Equilibrium कहते हैं।
Phase (प्रावस्था)
पदार्थ का समांग भाग जिसमें सभी गुण समान हों।
Component (घटक)
वे न्यूनतम स्वतंत्र पदार्थ जिनसे सिस्टम का निर्माण होता है।
Degree of Freedom (स्वतंत्रता की डिग्री)
वे स्वतंत्र चर जिन्हें बदला जा सकता है, जबकि संतुलन बना रहता है।
Gibbs Phase Rule
जहाँ—
- F = Degree of Freedom
- C = Components
- P = Phases
एक अवयवी तंत्र (One Component System)
1. Water System
जल की ठोस, द्रव और वाष्प अवस्थाओं के बीच संतुलन का अध्ययन।
2. Carbon Dioxide System
CO₂ के विभिन्न चरणों का अध्ययन तथा ट्रिपल पॉइंट का महत्व।
3. Sulfur System
सल्फर के विभिन्न क्रिस्टलीय रूपों (Rhombic एवं Monoclinic) का अध्ययन।
ऊष्मागतिकी एवं ऊष्मारसायन के अनुप्रयोग
- विद्युत उत्पादन
- रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग
- रासायनिक उद्योग
- उर्वरक उद्योग
- पेट्रोलियम शोधन
- खाद्य प्रसंस्करण
- धातुकर्म
निष्कर्ष
First Law of Thermodynamics and Thermochemistry रसायन विज्ञान की मूलभूत अवधारणाएँ हैं। प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण की व्याख्या करता है, जबकि ऊष्मारसायन रासायनिक अभिक्रियाओं में होने वाले ऊष्मा परिवर्तन का अध्ययन करता है। एन्थैल्पी, Heat Capacity, Joule-Thomson Effect, Hess’s Law तथा Phase Equilibrium जैसे विषय उद्योग, अनुसंधान और दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। B.Sc. Chemistry के विद्यार्थियों के लिए इन सिद्धांतों की समझ आगे के सभी ऊष्मागतिक अध्यायों की नींव है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- First Law of Thermodynamics का कथन एवं गणितीय रूप।
- Enthalpy एवं उसके प्रकार।
- Heat Capacity (Cp एवं Cv) में अंतर।
- Joule-Thomson Effect एवं Inversion Temperature।
- Isothermal एवं Adiabatic Expansion।
- Hess’s Law एवं उसके अनुप्रयोग।
- Gibbs Phase Rule।
- Water, Carbon Dioxide एवं Sulfur One Component Systems।